NRC में नाम नहीं आने पर सिर्फ मु’सलमान को नहीं हिं’दुओं को भी जाना होगा जेल

कुछ लोग कह रहे हैं कि काहे झूठ-मूठ का ड्रामा कर रहे हो, जब नागरिकता संशोधन बिल का हमारे देश के नागरिकों से कोई लेना-देना ही नहीं है, तब काहे का प्रदर्शन, काहे का विरोध।

आप सही कह रहे हैं, हम भी वही कह रहे हैं जो आप कह रहे हैं, लेकिन हम व्यवस्था से कह रहे हैं। ई NRC,CAA, मुसलमान, गैर मुसलमान ये सब ड्रामा क्या है?

असम में कुल 1220 करोड़ रुपये खर्च करके NRC लागू किया गया। NRC के अनुसार कुल 19 लाख लोग अपनी नागरिकता साबित नहीं कर पाए। इनमें बहुसंख्यक आबादी हिंदुओं की चिन्हित हुई जबकि 4-5 लाख ही मुसलमान हैं। NRC का उद्देश्य यह था कि घुसपैठियों को चिन्हित कर असम से बाहर निकाला जाए और वहाँ के मूल निवासियों को उनका अधिकार मिले, उनकी भाषा,संस्कृति आदि की रक्षा हो सके।


लेकिन हुआ क्या..ये 19 लाख लोग विरोध प्रकट करने लगे। जितने भी हिन्दू NRC लगाने को लेकर फुदक रहे थे, लिस्ट में नाम नहीं आने पर अपनी औकात में आ गए। दूसरे को भगाने चले थे और खुद विक्टिम हो गए।


फिर अमित शाह ने घोषणा की कि हिंदुओं को घबराने की जरूरत नहीं है। उन्हें देश से बाहर नहीं किया जाएगा लेकिन वो असम के मूल निवासियों की बात भूल गए, जिसके लिए यह पूरी प्रक्रिया शुरू हुई थी।

और ले आये ‘नागरिकता संशोधन विधेयक’ जिसमें यह बात कही गयी है कि पड़ोसी देश पाकिस्तान,अफगानिस्तान,बंग्लादेश से आने वाले हिंदुओं,सिखों,ईसाइयों,बौद्धों,जैनियों,पारसियों को नागरिकता दी जाएगी। लेकिन मुसलमान का कहीं जिक्र तक नहीं किया। ऐसा क्यों?

सवाल यह है कि क्या मुसलमानों के साथ डाक्यूमेंट्स संबंधित गड़बड़ीयाँ नहीं हो सकती है? क्या हमारा संविधान हिंदुओं को अलग और मुस्लिमों को अलग अधिकार और स्वतंत्रता देता है? आख़िर किस आधार पर यह फैसला लिया गया? यदि शोषित और पीड़ित होना ही पैमाना है, तो तीनों पड़ोसी देशों से क्राइम का डेटा मंगवा लिया जाए और तमाम शोषित,पीड़ित,वंचित व्यक्तिओं को भारत की नागरिकता ही दे दी जाए!

आज देश के 3% आबादी वाले असम में 20 साल से ज्यादा के उठापटक भरे प्रयास के बाद 1220 करोड़ रुपया खर्च करके NRC लागू किया। यदि पूरे देश में NRC लागू किया जाए तो कुल कितना पैसा और समय लगेगा, कोई भक्त बताएं? और फिर परिणाम क्या होगा?

इस वक़्त जिस देश में 49 करोड़ लोग भूमिहीन हैं। 17लाख 70 हजार लोग बेघर हैं। उस देश में आप नागरिकता साबित करने वाला ड्रामा कर रहे हैं। जिस देश की अर्थव्यवस्था अभी सुस्ती में बहै, उस देश में आर्थिक स्तर पर बड़े फैसले लेने के बजाय CAA और NRC का खेल खेल रहे हैं..रोजगार पर बात करने के बजाय हिन्दू-मुस्लिम कर रहे हैं।कीजिये..देखते हैं विकास कब तक आता है!

हृतिक चौधरी

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