जब इन्दिरा ने अमेरिकी राष्ट्रपति के तेवर को पस्त कर, घुटनों के बल लेटने को मजबूर कर दिया था!

© प्रियांशु

यह जग जाहिर है कि देश की लौह महिला, महियशी और मेधावी नेत्री और प्रथम महिला प्रधानमंत्री श्रीमति इन्दिरा गांधी के प्रखर नेतृत्व और असामान्य तेज, साहस और प्रकांड हिम्मत का ही नतीजा है कि पड़ोसी देश पाकिस्तान आज दो टुकड़ों में बंटा हुआ है.

वह इन्दिरा का राष्ट्र प्रेम ही था जो उन्हें अमेरिका और पाकिस्तान की गीदड़भभकियों पर बुलंद हौसलेे से ललकारने की हिम्मत देता था।
वह इंदिरा गांधी की बेखौफ रणनीति का ही नतीजा था कि चीन जैसे ताकतवर देश के समर्थन के बावजूद भी पाकिस्तान की सेना घुटने टेकने पर मजबूर हो गई थी।

दिसंबर 1971 के दौरान जब इंदिरा की नेतृत्व वाली भारतीय सेना बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान पाकिस्तानी सेनाओं को घुटनों पर चलने को मजबूर कर रही थी तब चीन, अमेरिका और ब्रिटेन जैसे दुनिया के बड़े देश पाकिस्तान को अपना समर्थन दे रहे थे और पाकिस्तान के साथ खड़े होकर हर संभव प्रयास कर रहे थे कि भारत अपने कदम इस युद्ध से बाहर कर ले।

लेकिन तब शख्त तेवर वाली गरजती इंदिरा ने अमेरिका के राष्ट्रपति निक्सन को बुलंद आवाज में जवाब दिया था –

“हम पीछे नहीं हटेंगे. हम एक कदम भी पीछे नहीं हटेंगे.
कोई भी भारत को आदेश देने का दुस्साहस ना करें।”

इंदिरा ने दुनिया के तमाम बड़े देशों को ललकारते हुए कहा था , “दुनिया के तमाम तथाकथित बड़े देश अपने भड़कीले ओझेपन के आधार पर उनकी इक्षानुसर कुछ भी करने का आदेश भारत को ना दें। वो समय गुजर गया जब 3-4 हज़ार मिल दूर से कोई देश भारत को आदेश दिया करता था”।

इंदिरा के इस बयान के बाद अमेरिका गुस्से में आ गया और अपने सातवे बेड़े से बंगाल की खाड़ी में परमाणु युद्धक जहाज को रवाना कर दिया।

अमेरिका, चीन और ब्रिटेन जैसे दुनिया भर के महा शक्तिशाली देशों से लोहा लेते हुए इन्दिरा तनिक भी ना डगमगाई और सबकी घुड़की को तोड़ते हुए महज़ 14 दिनों में पाकिस्तानी सेना को घुटने के बल लेटने को मजबूर कर दिया। पाकिस्तान ने अमेरिका के सातवें बेड़े के बंगाल की खाड़ी में पहुंचने से पहले ही युद्ध में सरेंडर कर दिया और भारतीय सेना ने पाकिस्तान को हमेशा के लिए दो हिस्सों में तोड़कर रख दिया.

इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने अपनी चर्चित किताब ‘इंडिया आफ्टर गांधी’ में लिखा है, “देश की ताकत और इंदिरा गांधी के हौसले को अमेरिका और चीन जैसे देशों में बहुत कमतर आंकने की गलती की. नतीजा पाक ने भुगता. जिनके दम पर पाकिस्तान इतरा रहा था, न वो मदद कर पाए, न उसकी सेना भारतीय सेना के सामने टिक पाई”.

लोकसभा में लगे थे इन्दिरा ज़िंदाबाद के नारे

सागरिका घोष की किताब ‘इंदिरा’ के अनुसार पाकिस्तान को करारी हार देने के बाद लोकसभा ‘इंदिरा गांधी जिंदाबाद’ के नारे से गूंज उठी. विपक्षी सांसदों ने भी माना कि बंगलादेश की आजादी के लिए इंदिरा गांधी का नाम स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा और उसी दौरान इंदिरा गांधी की तुलना देवी दुर्गा से भी की गई थी। हालांकि बाद में वाजपेई साहब इससे मुकरते भी रहे।

ना जाने किस मिट्टी की बनी थी इंदिरा

इंदिरा गांधी नाम कि वो महिला भारत की मिट्टी से निकली वो कोहिनूर थी जिसके नाम के सामने दुनिया भर के महाशक्तिशाली देशों के हुक्मरानों के तेवर धुंधले नज़र आते थे।
वो इन्दिरा ही थी जिसने अमेरिका चीन और पाकिस्तान कि गीदड़भभकियों को बौखलाहट में बदल दिया था।
इंदिरा तो इंदिरा थी, तभी तो इन्दिरा इज़ इंडिया थी और इंडिया इज़ इन्दिरा!

इन्दिरा तो इन्दिरा थी

ख़ैर, वो भी एक वक़्त था जब कोई देश भारत की तरफ़ आंख उठाने से पहले सौ बार सोचता था। वो भी एक वक़्त था जब दो देशों के राष्ट्रध्यक्ष दुनिया को दिखावटी दोस्ती का पैग़ाम नहीं देते थे। वो भी एक वक़्त था जब दूसरे देशों के राष्ट्रपति भारत में अपना माल बेचने आते थे तो उनके नमस्ते में 120 करोड़ नहीं लुटाए जाते थे।

हम कहां थे, कहां आ गए

आज ट्रंप ने मोदी जी की विदेश नीति और भारत-अमेरिका दोस्ती के झूठे जुमलों पर जोरदार लात मारते हुए. करारा जवाब देने का ऐलान किया है, और वो भी महज मलेरिया की दवाई की सप्लाई के लिए। हम कहां थे कहां आ गए…

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *