9 साल के इंतजार के बाद बिहार के इस इलाके में पहुंची ट्रेन, लोगों ने PM मोदी का जताया आभार

Desk: सुपौल जिले के प्रतापगंज से देश के भिन्न-भिन्न हिस्सों में रेल मार्ग से सफर करने की हसरत लिए बैठे लोगों में सोमवार की दोपहर ट्रायल इंजन के पहुंचते ही खुशी की लहर दौड़ गई. 20 जनवरी 2012 यानी बीते 9 वर्षों के बाद प्रतापगंज रेलवे स्टेशन पर बड़ी रेल लाइन का पहला ट्रायल इंजन पहुंचा.

यह देख वहां मौजूद लोगों ने कहा कि करीब दशक भर बाद ट्रेनों के चलने की आस जग गई है. रेल इंजन की सीटी बजते ही हजारों की संख्‍या में महिला, पुरुष, बच्चे और बुजुर्ग प्रतापगंज स्टेशन पर उमड़ पड़े. वर्षों बाद रेलवे स्टेशन पर इंजन को देखने को लेकर लोगों में खुशी का माहौल था. लोगों ने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया. बता दें कि पीएम मोदी ने कुछ ही महीने पहले कोसी नदी पर बने रेल महासेतु पर ट्रेन परिचालन को हरी झंडी दिखाई थी.

लोगों को अब लगने लगा है कि जल्द ही रेल की सवारी करने का सपना पूरा होगा. रेल परिचालन के लिए उत्सुक लोग एक दूसरे से पूछते दिख रहे थे कि आखिर कब से ट्रेनों का चलना प्रारंभ होगा. दरअसल, पिछले वर्ष ही सहरसा से सरायगढ़-आसन्नपुर और राघोपुर तक बड़ी रेल लाइन की ट्रेनों का परिचालन शुरू हुआ है. इसके बाद राघोपुर से फारबिसगंज के बीच धीमे चल रहे आमान परिवर्तन कार्य में गति देखी गई. इसी क्रम में 9 वर्षों के बाद 11 जनवरी 2021 को दोपहर 1.30 मिनट में सहरसा से ट्रायल इंजन प्रतापगंज स्टेशन पहुंचा, तो लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा.

मार्च-अप्रैल से परिचालन संभव
रेल इंजन ट्रायल का जायजा लेने पहुंचे रेलवे के डिप्टी चीफ इंजीनियर संजय कुमार से जब फारबिसगंज तक रेल परिचालन के संदर्भ में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि इस मामले की पूर्ण जानकारी तो वरीय पदाधिकारी ही दे सकते हैं. उन्होंने बताया कि मार्च-अप्रैल तक ललित ग्राम तक अमान परिवर्तन का कार्य पूरा कर ट्रेनों का परिचालन होना संभव है. ललित ग्राम से फारबिसगंज के बीच भी अमान परिवर्तन का कार्य तेजी से किया जा रहा है.
दरभंगा से भी जल्द जुड़ जाएगा कोसी

आपको बता दें कि 18 सितम्बर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुपौल स्टेशन से आसनपुर कुसहा के लिए पैसेंजर ट्रेन को हरी झंडी दिखाई थी. 85 साल के बाद इस रूट पर ट्रेन चलने से पूरे मिथिला क्षेत्र में खुशी का माहौल है. इसके बाद से ही लोगों को उम्मीद है कि जल्द ही यह इलाका सीधे तौर पर दरभंगा से जुड़ जाएगा. इसके बाद दरभंगा से सीमांचल के इलाकों में जाना और आसान हो जाएगा.

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