बिहार में सदर अस्पताल की बत्ती गुल, नहीं चला जेनरेटर तो मोबाइल की रोशनी में हुआ इलाज

Patna: बिहार सरकार और सूबे के स्वास्थ्य मंत्री भले ही स्वास्थ्य सेवा में बेहतरी का दावा करें, लेकिन इसमें सुधार की कोई गुंजाइश होती नहीं दिख रही. ताजा मामला गोपालगंज (Gopalganj) से जुड़ा है जिसके स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे (Mangal Pandey) प्रभारी मंत्री भी हैं. यहां के सदर अस्पताल में मोबाइल की रोशनी में मरीजों का इलाज हो रहा है.

दरअसल सोमवार की देर रात सड़क हा’दसे में एक युवक घा’यल हो गया. युवक की स्थिति काफी गंभीर थी इस कारण उसे अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया लेकिन यहां पहले से ही बत्ती गुल थी. दर्द और ज्यादा ब्ली’डिंग की वजह से मरीज कराहता रहा, लेकिन बिजली के अभाव में डॉक्टर उसका इलाज शुरु करने का इंतजार करते रहे. उसका इलाज शुरू भी किया गया तो वो भी मोबाइल की रोशनी में जिसके बाद बमुश्किल उसकी जान बचाई जा सकी.

उसी अस्पताल में एक और मरीज ने बताया कि मैंने अपने परिजन को सांस की समस्या होने पर अस्पताल में भर्ती कराया लेकिन करीब 1 घंटे तक बिजली कटी रही जिसकी वजह से मोबाइल की टॉर्च की रोशनी में मरीज को ऑक्सीजन दिया गया.

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मरीज की शिकायत मिलते ही एसडीएम उपेंद्र कुमार पाल ने सीएस और हेल्थ मैनेजर को फटकार लगाई लेकिन उनके फटकार लगाने के बावजूद भी अस्पताल में कई घंटे तक बिजली बाधित रही. अस्पताल में मौजूद लोगों ने श’व को पोस्टमार्टम कराने के लिए भी घंटों इंतजार करने का आ’रोप लगाया है.

आपको बता दें कि गोपालगंज सदर अस्पताल में बिजली की व्यवस्था अधिकांश तौर पर बाधित होती है. बिजली की व्यवस्था सही रहे इसके लिए अस्पताल में जेनरेटर की व्यवस्था की गई है जिस पर हर साल लाखों रुपए होता है लेकिन यह सारी चीजें जरूरत पड़ने पर फिसड्डी साबित होती हैं.

इस मामले पर राजद नेता और किसान सेल के जिलाध्यक्ष अरुण कुमार सिंह ने भी स्वास्थ्य मंत्री को घेरा है और कहा कि सदर अस्पताल का यही हाल है लेकिन अगर सूबे के स्वास्थ्य मंत्री जो कि गोपालगंज के प्रभारी मंत्री भी हैं को कम से कम इमरजेंसी वार्ड और सदर अस्पताल में बिजली की व्यवस्था पर ध्यान देने की जरूरत है.

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