क्रिकेट में फिसड्डी थे तेजस्वी, आज POLITICS में मार रहे हैं लंबे-लंबे चौक्के-छक्के

PATNA : तेजस्वी यादव ने राजनेता बनने से पहले क्रिकेट में हाथ आजमाया था। लेकिन तेजस्वी को क्रिकेट में नाकामी का मुंह देखना पड़ा। 2015 में वे पहली बार विधायक बने और 26 साल की उम्र में ही बिहार के डिप्टी सीएम बन गये। पिता लालू प्रसाद ने उन्हें राजनीति के सिंहासन पर तो बैठा दिया लेकिन भ्रष्टाचार का मामला दर्ज होते ही उनके राजनीतिक भविष्य पर संकट पैदा हो गया है। क्रिकेट की तरह एक और नाकामी उनके सिर पर मंडरा रही है। तेजस्वी की पढ़ाई भारत के प्रतिष्ठित स्कूल में हुई लेकिन उनका मन पढ़ाई में नहीं लगा।

वह आरके पुरम स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूरल में पढ़े लेकिन नौंवी क्लापस से आगे नहीं बढ़ सके। पढ़ने से मन उचट गया तो उन्होंरने क्रिकेट का रुख किया। उन्हें पहले झारखंड टीम, और फिर आईपीएल में खेलने का मौका मिला, मगर वह यहां भी सफल नहीं हो सके। वह आईपीएल टीम में कई बार चुने गए, लेकिन कभी प्ले इंग इलेवन का हिस्‍सा नहीं बन सके। उन्होंने घरेलू क्रिकेट में चार टी-20 खेले, जिनमें से एक में उन्हें बल्लेोबाजी करने का मौका मिला था, लेकिन वह सिर्फ 3 रन ही बना सके थे। क्रिकेट खेलने के दौरान तेजस्वी महेंद्र सिंह धोनी के फैन थे और वह बाल भी उन्हीं की तरह रखते थे।

राजनीति में आने के बाद उन्होंउने लंबे बाल कटवा लिए। तेजस्वी ने अपने क्रिकेट करियर कुल सात मैच खेले। उन्होंने फर्स्ट क्लास का एक मैच, दो लिस्ट ए मैच और चार टी-20 मैच खेले हैं। उनका टॉप स्कोर 19 रन है और बोलिंग में उन्होंने 10 रन देकर 1 विकेट ले रखा है। जब इस तरह का प्रदर्शन हो तो भला कौन सी टीम तेजस्वी को मौका देती। तेजस्वी विकेटकीपर-बल्लबाज़ थे। राबड़ी देवी के सीएम बनते ही तेजस्वी की क्रिकेट प्रतिभा की बात होने लगी थी।

तेजस्वी दिल्ली के लिये भी अंडर-16, अंडर-19 खेले हैं। 2008, 2009, 2011 और 2012 IPL में दिल्ली डेयरडेविल्स ने उन्हें ख़रीदा था। लेकिन तेजस्वी को कभी IPL खेलने का मौक़ा नहीं मिला। उस समय चर्चा थी कि दिल्ली डेयर डेविल्स ने तेजस्वी को तीस से चालीस लाख रुपये में ख़रीदा था। एक बार लालू प्रसाद यादव से जब IPL में तेजस्वी के खेलने पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने जवाब था कि अगर उनके लड़के को खेलने का मौका नहीं मिला तो कम से कम उसे खिलाड़ियों को पानी पिलाने का तो काम मिलेगा ही।

आखिरकार तेजस्वी क्रिकेट में फेल हो गये । पढ़ाई में मैट्रिक भी पास नहीं कर सके। कोई और रास्ता नहीं बचा तो तेजस्वी पिता की विरासत को संभालने राजनीति में आ गये। उनके राजनीति में आने के डेढ़ साल बाद ही ऐसा बबंडर उठ खड़ा हो गया है कि राजद की नाव डगमगाने लगी है।

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