कौन ससुरा कह रहा है के उत्तर भारतीय में योग्यता की कमी है, बिना योग्यता के एतना दहेज लेकर आ रहे हैं

“उत्तर भारतीय नौकरी के योग्य नहीं है.” केन्द्रीय मंत्री और वरिष्ठतम भाजपा नेता संतोष गंगवार के इस बयान से भडकने की जगह हम सब को उनका स्वागत करना चाहिए. अवसर मिले तो हार्दिक अभिनंद्न भी. शायद तभी, एन आर नारायणमूर्ति तक को कहना पडा कि कोचिंग इंडस्ट्री ने आईआईटी स्टुडेंट्स तक की गुणवत्ता में कमी ला दी है. एक संस्था है, एस्पायरिंग माइंड्स. उसकी 2019 की एम्प्लॉयबिलिटी रिपोर्ट बताती है कि 80 फीसदी इंजीनियरिंग ग्रेडुएट नॉलेज इकोनोमी में जॉब के लायक नहीं है. टेक महिन्द्रा के सीईओ सीपी गुरनानी कहते हैं कि 94% इंजीनियरिंग ग्रेडुएट हायरिंग के लिए फिट नहीं है. टॉप 10 टेक कंप्नीज इनमें से सिर्फ 6% ग्रेडुएट को ही काम पे लेती है.10 साल पहले हे ऐस तरह की रिपोर्ट मैकेंजी ने दी थी.

संभवत:. मेडिकल साइंस और अन्य पेशे को ले कर भी यही तल्ख सच्चाई हो, जिससे हम अभी तक अंजान है. मैं पत्रकार हूं. बता सकता हूं कि प्राइवेट संस्थाओं से पढ कर आने वाले अधिकांश प्रशिक्षु पत्रकारों को किस तरह से धोखा दिया जा रहा है. 4-5 लाख रुपये में पत्रकारिता की पढाई, सुन कर ही मुझ जैसों की हालत पतली हो जाते है, जिसने 5 हजार रुपये में दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढाई कर ली थी. ये एक लंबी कहानी है, जिस पर बहुत कुछ लिखा गया है, लिखा जा सकता है.

संतोष गंगवार श्रम मंत्री है. उनके पास आकडों की कमी नहीं होगी. वो जानते होंगे कि कितनों का पीएफ कटता है, कितने बेरोजगार है,कितनों को रोजगार मिला है. लेकिन, उन्होंने ये नहीं बताया कि कितने नेताओं के यूनिवर्सिटी चल रहे है? कितने स्कूल के धन्धे में है? ऐसे यूनिवर्सिटी, ऐसे स्कूल की नाम भी कमाल के. बिहार से हूं. नया ट्रेंड है, जमीन बेच कर, कर्ज ले कर, मां-बाप बच्चों को गलगोटिया, एमिटी, लवली भेज रहे है. 10 लाख से कम की कोई पढाई नहीं है. पास आउट होने के बाद, जैसे-तैसे कोई नौकरी मिली, कभी नहीं भी मिली, कभी लंबा इंतजार करना पडा. और जब नौकरी मिली भी तो स्तरीय नहीं.

तो संतोष गंगवार को बताना चाहिए कि पिछले 70 सालोअ, खास कर 30 सालों और स्पेशिफिकली पूछे तो भाजपा के 12 सालों के शासन के दौरान देश में कितने नए आईआईटी, इंजीनियरिंग कॉलेज, मेडिकल कॉलेज या अन्य प्रोफेशनल कोर्स की संस्थाएं खोली गई, जहां उत्तर भारतीयों को स्तरीय शिक्षा मिल सके. गंगवार जीके पास इसका जवाब नहीं होगा. होगा भी तो देंगे नहीं. कौन बुढापे में मंत्री पद का मजा छोडना चाहेगा?

फिर भी, मंत्री जी को एक कटु सच बोलने के लिए धन्यवाद. आपने सचमुच अपनी, सरकार नाम की संस्था की, भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था की और उत्तर भारतीयों को उनकी औकात से रूबरू कराया है. धन्यवाद संतोष गंगवार…ईश्वर आपकी योग्यता यूं ही बनाए रखे, बचाए रखे…

-Shashi Shekhar

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