नागरिकता संशोधन बिल राज्यसभा में भी पास, पक्ष में 125, जबकि विपक्ष में 105 वोट पड़े

नागरिकता संशोधन बिल को राज्यसभा ने भी मंजूरी दे दी। विधेयक के पक्ष में 125 वोट पड़े, जबकि विपक्ष में 105 वोट पड़े। राज्यसभा में इस पर करीब 8 घंटे तक बिल पर बहस चली। शाह ने दोपहर को उच्च सदन में यह बिल पेश किया था। लोकसभा इस बिल को सोमवार को ही मंजूरी दे चुकी है। निचले सदन में विधेयक पर 14 घंटे तक बहस के बाद रात 12.04 बजे वोटिंग हुई थी। बिल के पक्ष में 311 और विपक्ष में 80 वोट पड़े थे।

बुधवार को राज्यसभा में नागरिकता बिल पर बहस का जवाब देते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने कहा- यह बिल किसी की नागरिकता नहीं छीन रहा है। हम किसी को नागरिकता दे रहे हैं, तो भारत के मुसलमानों को क्या आपत्ति होगी। भारत में मुस्लिमों को सम्मान मिला है, उनकी नागरिकता पर कोई असर नहीं पड़ना है। अमित शाह ने कांग्रेस से कहा, “मेहरबानी करके राजनीति करिए, लेकिन ऐसा करके देश में भेद नहीं खड़ा करना चाहिए। ये संवेदनशील मामले होते हैं और ये जो आग लगती है अपने ही घर को जलाती है।” उन्होंने कहा- अमित शाह ने कहा, “क्या मुसलमान आएगा, तभी पंथ निरपेक्षता होगी। आपकी व्याख्या सीमित है और हमारी व्यापक है।”

अमित शाह ने कहा- धर्म के आधार पर देश का विभाजन न हुआ होता, तो बिल लाने की जरूरत नहीं पड़ती। बिल से पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान के गैर-मुस्लिमों को भारत की नागरिकता मिलेगी। यह झूठ फैलाया जा रहा है कि बिल मुस्लिमों के खिलाफ है। मैं पूछना चाहता हूं कि जो देश के नागरिक हैं, उन्हें किस बात की चिंता है। हम यह किसी एक धर्म के लिए नहीं कर रहे, हम तीन देशों के एक ऐसे क्लास को ले रहे हैं, जो धार्मिक आधार पर प्रताड़ित हैं। ऐसे सभी धर्मों के लिए बिल है।

बिल पर बहस के दौरान विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा- बिल के लिए जिन धर्मों का चुनाव किया गया, उसका आधार क्या है। वहीं कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने कहा कि इससे पहले कभी भी धर्म के आधार पर सरकारों ने फैसला नहीं लिया। यह सरकार जल्दबाजी में है। वहीं, कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा- अगर भारत देश अपनी संस्कृति और संस्कार के चलते लोगों को आश्रय दे रहा है, तो इसमें क्या गलत है। प्रसाद ने अपने भाषण में कश्मीर का जिक्र किया, तो टोका-टोकी शुरु हो गई। हालांकि अध्यक्ष के हस्तक्षेप के बाद कार्रवाई आगे बढ़ी।

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