दूल्हे ने पैर से भरी दुल्हन की मांग, बिहार के दरभंगा में युवक ने रचाई शादी, 8 साल से चल रहा प्रेम

DARBHANGA : एक विवाह ऐसा भी; दूल्हे ने पैर से भरी दुल्हन की मांग, 8 सालों का प्यार परवान चढ़ा तो मंदिर में रचाई शादी : किसी ने सच ही कहा है कि होगी प्यार की जीत। इसे एक प्रेमी युगल ने साबित कर दिखाया है। उन्होंने श्यामा मंदिर परिसर में अनोखी शादी रचाकर एक संदेश दिया है। प्यार ऐसा था कि परिवार की नाराजगी के बावजूद प्रेमिका ने प्रेमिका का साथ निभाया और दूल्हा बने युवक अपने पैर से प्रेमिका की मांग में सिंदूर डालकर अपना जीवन साथी बना लिया।

इलाके में इस अनोखी की खूब चर्चा हो रही है। लोग इसे फिल्म एक विवाह ऐसा भी का लोकल मेक बता रहे हैं जिसमें लीड रोल में प्रेमी नहीं बल्कि प्रेमिका है।

दरभंगा स्थित प्रसिद्ध श्यामा माई मंदिर शादी और अन्य संस्कारों के लिए चर्चित है। मंदिर में अक्सर शादियां होती रहती हैं। लेकिन मां काली को साक्षी मानकर मंदिर में हुई एक अनोखी शादी काफी चर्चा में है। इस शादी में सबसे बड़ा कौतूहल का विषय बना वरमाला और सिंदूर। लड़के ने अपने पैर से दुल्हन के गले में माला पहनाई और मांग में सिंदूर भरा। यह अनोखा नजारा देखने के लिए मंदिर में भीड़ जुट गई।

दूल्हा प्रदीप मंडल ने बताया कि लड़की उसके बड़े भाई का साली रीता कुमारी है। दोनों के बीच आठ साल से प्रेम-प्रसंग चल रहा था। दोनों ने शादी करने का फैसला कर लिया था लेकिन दोनों हाथो से दिव्यांग प्रदीप से शादी के लिए रीता के माता पिता तैयार नहीं थे। दुल्हन रीता कुमारी ने बताया कि उसके परिजन किसी अन्य लड़के से उसकी शादी करना चाह रहे थे। लेकिन रीता को मंजूर नहीं था। उसके बाद रीता ने घर से भागकर शादी करने का फैसला कर लिया। सुपौल जिले के दानपुर गांव की रीता कुमारी अपनी मर्जी से प्रदीप मंडल के साथ भागकर दरभंगा आ गई प्रेमी प्रदीप के साथ शादी कर ली।

यह अद्भुत विवाह दरभंगा स्थित प्रसिद्ध श्यामा काली मंदिर में संपन्न हुआ। घनश्यामपुर थाना क्षेत्र के देऊरी गांव निवासी प्रदीप मंडल के प्यार की आखिर जीत हुई। प्रेमी प्रदीप मंडल ने श्यामा माई मंदिर परिसर में अपने पैर से प्रेमिका को माला पहनायी और पैर से ही मांग में सिन्दूर डाला। ऐसी अनोखी शादी को देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। इस जोड़ी के वहां मौजूद सभी लोगों ने तालियां बजाकर आशीर्वाद दिया।

ग्रेज्युएट प्रदीप का कहना है कि फिलहाल वह बेरोजगार है। अगर मेरे घर वाले इस शादी को नहीं मानेंगे तो हम दरभंगा में ही रहकर कुछ काम करेंगे ताकि जीवन यापन कर सके। दिव्यांग प्रदीप की कहानी किसी प्रेरणा से कम नहीं है। प्रदीप अपने दोनों पैरों से कम्प्यूटर चलाने में भी माहिर है। पिता कुंवर मंडल और माता फूलो देवी की तीन संतानों में सबसे छोटा प्रदीप वर्ष 2008 में गांव में ही बिजली पोल के पास खेल रहा था। इसी दौरान 33 हजार वोल्ट के हाईटेंशन तार की चपेट में आने से उसके दोनों हाथ बुरी तरह झुलस गए। लेकिन उसने हार नहीं मानी। हाथ नहीं होने पर भी उसने पढा़ई जारी रखा और ग्रेजुएशन तक पढ़ाई की।

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