जानें कैसे कोरोना से जुड़ी जानकारी मेल पर भेज ई-वॉलेट से रकम उड़ाते थे साइबर ठग

Patna: साइबर ठगी गिरोह का सरगना कुणाल शर्मा पहली बार पुलिस के हत्थे चढ़ा। रविवार को गिरफ्तारी के वक्त पटना पुलिस को अंदाजा नहीं था कि उसके तार अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगों से भी जुड़े हुए हैं और वह कई करोड़ की ठगी कर चुका है। पुलिस की मानें तो कुणाल कई साल से यह धंधा कर रहा है पर पहली बार पटना में पकड़ा गया। छानबीन में पुलिस को पता चला कि कुणाल के खिलाफ इससे पहले कोलकाता और इंदौर में भी एफआईआर दर्ज हैं। इधर, पटना पुलिस लगातार जयपुर पुलिस से संपर्क में है। कोलकाता और इंदौर पुलिस से भी बिहार के आर्थिक अपराध शाखा की टीम कुणाल के बारे में जानकारी मांगी है। पुलिस कुणाल के साथियों का भी पता लगा रही है।

लिंक पर क्लिक करते ही यूजर के वॉलेट से निकल जाते थे रुपए
शातिर कुणाल के निशाने पर ई-वॉलेट रहता था। पूछताछ में खुलासा हुआ कि कुणाल कोरोना के नाम पर भी ठगी कर रहा था। वह लोगों को कोविड-19 की जानकारी से जुड़ा मेल भेजता था और फिर यूजर जैसे ही दिए गए लिंक पर क्लिक करता था यूजर के खाते से सारी राशि निकल जाती थी। वह अमेजन, फ्लिपकार्ट, फोन-पे, गूगल-पे आदि के ई-वॉलेट से पैसे उड़ाता था। वह अधिकांश पैसे का गिफ्ट वाउचर किसी परिचित के नंबर पर ट्रांसफर कर देता था।

ग्रुप में हैं मलेशिया, जांबिया, नेपाल और श्रीलंका के साइबर ठग

पुलिस ने कुणाल के ग्रुप के शातिरों को खंगालना शुरू किया तो चौंकाने वाली बात सामने आई। कुणाल के व्हाट्सएप ग्रुप पर मलेशिया, जांबिया, नेपाल, श्रीलंका, बंगलादेश जैसे देशों के साइबर ठग जुड़े हैं। पूछताछ में उसने पुलिस से कहा कि जब वह मलेशिया में हैकिंग का कोर्स कर रहा था तभी इन लोगों से संपर्क हुए थे। ये ठग दो तीन सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करते हैं जिससे ये यूजर का पासवर्ड क्रैक कर खाता में सेंध लगाते हैं।

साइबर क्राइम नहीं सुलझा पा रही पुलिस
राजधानी के हर थाने में हर महीने साइबर क्राइम के 15 से 20 मामले दर्ज होते हैं। पुलिस एक का भी उद्भेदन नहीं कर पाती है। कई थानेदारों के नाम से फेसबुक का फर्जी अकाउंट बनाकर लोगों से ठगी की कोशिश हुई लेकिन किसी को पुलिस ने गिरफ्तार नहीं किया। यह स्थिति तब है जब हर थाने से एक-एक को साइबर की ट्रेनिंग दी गई थी।

सतर्क रहें यूजर तो नहीं लगेगी चपत

कोविड की जानकारी के लिए आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं
दान देने के लिए आधिकारिक वेबसाइट का इस्तेमाल करें
ई-वॉलेट साइट पर कार्ड का डिटेल या पासवर्ड सेव नहीं करें
अपना फोन नंबर या मेल आईडी जितना संभव हो, गोपनीय रखें
किसी से अकाउंट नंबर या ओटीपी किसी भी स्थिति में साझा न करें

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