12वीं में दो बार फेल होने के बाद करने लगा मेहनत मजदूरी, इंस्पेक्टर की नौकरी करने के बाद UPSC पास कर बना IPS

12वीं में दो बार फेल, दिहाड़ी मजदूरी का किया काम, अब SI ऐसे पाई यूपीएससी में सफलता : संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा को पास करने के लिए धैर्य और लगातार मेहनत करनी पड़ती है. ऐसे ही एक शख्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने अपनी असफलता से हार नहीं मानी और आखिरकार वह सफलता की इबादत लिखने में कामयाब रहे. जिस शख्स की आज हम बात कर रहे हैं, उनका नाम शांतप्पा कुरुबारा (Shantappa Kurubara) हैं. वह पुलिस विभाग में सब इंस्पेक्टर की नौकरी (Sarkari Naukri) करते हुए यूपीएससी की परीक्षा को पास करने में सफल रहे हैं.

हंगली जिले के अंतर्गत श्रीरामपुरा पुलिस स्टेशन में तैनात पुलिस सब इंस्पेक्टर शांतप्पा कुरुबारा (Shantappa Kurubara) ने कन्नड़ में सिविल सेवा (मुख्य) परीक्षा-2023 लिखी. साथ ही कन्नड़ में साक्षात्कार में भाग लिया और सीएसई में 644 रैंक के साथ यूपीएससी की परीक्षा को पास की. कर्नाटक बोर्ड II PU यानी कक्षा 12वीं में दो बार असफल होने के बाद शांतप्पा यूपीएससी एग्जाम को क्रैक करने के लिए यहां तक पहुंच पाएं हैं.

यूपीएससी की परीक्षा में 644 रैंक लाने वाले शांतप्पा ने आठवें प्रयास में सफलता पाई हैं. वह बीएससी ग्रेजुएट हैं. शांतप्पा अपने इस रैंक से संतुष्ट नहीं हैं और वह अगले साल भी सिविल सेवा परीक्षा देने का फैसला किया है. उनका कहना है कि मैं आठवें प्रयास में सीएसई परीक्षा पास करने में सफल रहा हूं. मैं इस रैंक से संतुष्ट नहीं हूं. मैं अगले साल फिर से परीक्षा दूंगा. मेरा सपना भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी बनना है.

बल्लारी जिले के रहने वाले शांतप्पा ने अपने पिता को जल्दी खो दिया. उनका चाचा बेंगलुरु में एक प्रवासी दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम कर रहे थे और जब उनकी स्कूल की छुट्टियों होती थी तो उस दौरान उनके साथ काम करते हैं. मैं बल्लारी वापस गया और स्कूल पूरा किया. मैं II PU में दो बार फेल हुआ लेकिन बाद में ग्रेजुएट की पढ़ाई पूरी की और सब-इंस्पेक्टर बन गया. उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय उन अपमानों को दिया जो उन्हें PU में फेल होने पर झेलना पड़ा था.

सोशल वर्क में भी रहते हैं एक्टिव 
सब इंस्पेक्टर के रूप में सेवा करते हुए शांतप्पा विभिन्न सामाजिक सेवा गतिविधियों में लगे रहे. अन्नपूर्णेश्वरी नगर पुलिस स्टेशन में तैनात रहते हुए, उन्होंने इलाके की एक झुग्गी बस्ती में बच्चों को पढ़ाया और महामारी के दौरान किराने का सामान उपलब्ध कराने वाले परिवारों की मदद की. उन्होंने एक सोशल मीडिया अभियान भी चलाया और गोरागुंटेपाल्या जंक्शन पर एक मोबाइल शौचालय स्थापित किया. वह एक विजिटिंग फैकल्टी के रूप में कोचिंग सेंटरों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए पढ़ाते भी हैं.

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