उत्तरप्रदेश TET परीक्षा में घोटाला, टॉपर कैंडिडेट नहीं जानता देश के PM और राष्ट्रपति का नाम, 150 में से आया 143 नंबर

12 मई को सुपर टीईटी का रिजल्ट आया और रिजल्ट आउट होने के बाद जिस बंदे की मार्क शीट सबसे पहले वायरल हुई उसका नाम था धर्मेंद्र पटेल. धीरे-धीरे दर्जनों लोगों की लिस्ट आई. 150 में से 143 से लेकर 130 नंबर तक पाने वाले ये कैंडिडेट अंडरग्राउंड होने लगे. मीडिया या अन्य कैंडिडेट्स से बात करने से बचने लगे. इन कैंडिडेट्स का एकेडमिक बैकग्राउंड भी सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा. जिसे देखने पर पता चलता है कि किसी को हाईस्कूल के बाद इंटर पास करने में 4 साल लग गए तो किसी ने ग्रेजुएशन पूरा करने में 7 साल लगा दिए. कई ऐसे लोग हैं जिनके 5 विषय की परीक्षा TET में नंबर आए 100 में 40, 35. जबकि उससे ज्यादा कठिन और 14 विषयों वाले लिखित परीक्षा में 90-95 प्रतिशत अंक आए. जबकि इन दोनों परीक्षाओं के बीच लगभग एक महीने का गैप था. अब एक महीने में ई लोग पता नहीं कौन सी घुट्टी पिए कि सीधा 140+ पर जाकर रुके.

सोशल मीडिया पर ऐसी भी कई मार्कशीट वायरल है जिनमें एक ही परिवार के कई लोग पास हुए हैं. सबके लगभग बराबर ही नंबर हैं. जैसे नन्हू यादव के परिवार में तीन लोगों ने परीक्षा दी और तीनों के नंबर हैं, 132, 131 और 128. गोरख सिंह के परिवार में 2 लोगों को 127 और तीसरे को 126 नंबर मिले हैं. एक ऑडियो भी वायरल हुआ जिसमें राजू पटेल बता रहे थे कि किस तरह वो और उनकी बहन सेटिंग के जरिए पास हुए.

मजेदार बात ये है कि पीएनपी (परीक्षा नियामक प्राधिकरण) खुद सारे सवालों का सही जवाब नहीं दे पा रही है. और चचा लोग 150 में 143 पीट दे रहे हैं. और अब तक किसी कोचिंग वाले ने ये नहीं कहा कि टॉपर हमारी कोचिंग का है. जबकि आमतौर पर रिजल्ट आते ही टॉपर्स के पोस्टर लगने लगते हैं. परीक्षा से एक दिन पहले यूट्यूब पर ऑन्सर की आने का मामला भी कोर्ट में है. ये सब खलेआम इशारा कर रहे थे कि भर्ती में जमकर धांधली हुई है. योग्य अभ्यर्थियों की भर्ती का दावा करने वाली सरकार भ्रष्ट अभ्यर्थियों की हिमायती बनी बैठी है. जिनका हक मारा जा रहा है वो अगर सवाल उठा रहे हैं तो शिक्षा मंत्री कह रहे हैं ब्लॉक कर दूंगा. लेकिन जिन्होंने धांधली की, जिन्होंने पेपर आउट कराया उन पर कोई कार्रवाई नहीं.

69000 शिक्षक भर्ती की जिस दिन लिखित परीक्षा हुई थी उस दिन से ही इसके पेपर आउट होने और भयंकर धांधली होने की बात कही जा रही है. लेकिन सरकार मानने को तैयार ही नहीं. लिहाजा डेढ़ साल तक कोई कार्रवाई नहीं हुई. ये तो भला हो राहुल सिंह का और इलाहाबाद के एसएसपी सत्यार्थ अनिरुद्ध का जिन्होंने मधुमक्खी के छत्ते में हाथ डाला. 11 लोग गिरफ्तार हुए हैं. बाकियों को खोजा रहा है. थोड़ी बहुत उम्मीदें जगीं हैं. अन्यथा सड़ चुकी यूपी की भर्ती आयोगों के खेल में कोई भी खलल नहीं पड़ने वाला है. चाहे कोई भी मुख्यमंत्री बन जाए, किसी की भी सरकार आ जाए.
गौरव श्याम पांडेय

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