UPSC में पांच बार फेल होने वाला लड़का बना अफसर, हार मानकर करने जा रहा था PVT नौकरी, रैंक 55 लाकर बना IPS

5 बार फेल होने के बाद प्राइवेट जॉब में वापस जा रहे थे, 17 दिन की तैयारी में बन गए IPS : किसी ने सच ही कहा है की कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती. आसान भाषा में कहा जाए तो अगर आप जीवन में 10 बार फेल होते हैं तो हार मानने के बदले आपको जमकर मेहनत करते हुए एक और प्रयास करना चाहिए. विश्वास कीजिए आपको सफलता जरूर मिलेगी. आज जिस लड़के की कहानी हम आपको बताने जा रहे हैं वह वर्तमान समय में एक आईपीएस अफसर है. लेकिन आपको जानकर आश्चर्य लगेगा कि वह लड़का यूपीएससी में पांच बार फेल हो चुका है और जीवन में कई प्रतियोगिता परीक्षाओं में भी और सफल रह चुका है. हार मानने के बदले उसने संघर्ष करने का निर्णय लिया और आज एक सफल आदमी के रूप में जाना जाता है.

अक्षत कौशल आईपीएस अफ़सर हैं. यूपीएससी में 55वीं रैंक उन्हें मिली थी. उन्होंने 5 बार यूपीएससी की परीक्षा दी, लेकिन सफल नहीं हो पा रहे थे. इन सबके बीच 17 दिनों की तैयारी करके वह आईपीएस अफ़सर बन गए. लेकिन, इसके पीछे उनके 5 सबक थे, जिसने सबकुछ बदल दिया.

एक वीडियो इंटरव्यू में अक्षत कहते हैं, पहले साल की तैयारी में वह सुबह 2 घंटे की कोचिंग फिर पूरे दिन घर ममें पढ़ाई. वह लगातार मेहनत करते थे. लेकिन, वो पहले साल प्री भी नहीं निकाल पाए.  इसके बाद अगले साल मतलब 2013 में भी उन्होंने कई ग़लतियां कर दी, जिससे उनका सी सैट भी नहीं निकल पाया. 

इसके बाद उन्होंने यूपीएससी निकालने के लिए 5 सबक लिए. बस यहीं से उनकी तस्वीर बदल गई.

पहला सबक

Jअक्षत के मुताबिक़ सिविल सर्विस के लिए परीक्षा के नेचर  को समझने की ज़रूरत है. हम हर बार ये सोचते हैं कि ये विषय तो आता है, लेकिन बाद में वही विषय गड़बड़ कर जाता है. ऐसा मेरे साथ हुआ लेकिन बाद में मैंने देखा कि बहुतों के साथ ऐसा होता है. इसलिए आप खुदपर बीते उसके बाद सबक लीजिए उससे अच्छा है कि दूसरों से ही सबक ले लीजिए.

अक्षत के मुताबिक़, लोग कुछ विषयों को हल्के में लेने लगते हैं.  ये एक बड़ी चूक है. किसी भी विषय को हल्के में न लें. बाद में होता ये है कि आप जिस विषय को हल्के में लिए होते हैं, उसी विषय में आपके नंबर गड़बड़ हो जाते हैं.

जब आप यूपीएससी की तैयारी कर रहे होते हैं तो आपके पास अच्छे दोस्तों का एक ग्रुप होना चाहिए. इनके साथ आप लगातार चीजों पर डिस्कशन करते हैं. शुरुआती असफलता के बाद मैंने तय किया कि मैं फिर से जॉब में वापस चला जाऊं. लेकिन, मेरे दोस्तों ने मुझे रोका. मोटिवेट किया. गलतियों पर टोका. कुल मिलाकर उन्होंने बहुत मदद की.

मेन्स को लेकर मुझे लगता था कि मैं बहुत अच्छा लिख लेता हूं. मेरी पीस अखबार में भी छपती थी. इससे एक कॉन्फिडेंस था. बस यही कॉन्फीडेंस ओवर कॉन्फिडेंस में बदल गया और साल 2016 की परीक्षा ख़राब चली गई. ऐसे में यदि आप किसी विषय को अपनी ताकत मानते हैं तो भी उसपर लगातार काम करिए.

आप अच्छी तैयारी कर रहे हैं तो सफलता ज़रूर मिलेगी. लेकिन, इसके लिए आपको लगातार अपने दिल की सुननी होगी. मैंने तमाम ग़लतियों से सीखा. लेकिन 17 दिन की तैयारी में निकाल भी लिया. हालांकि, इसके पहले मैंने अपना कॉन्सेप्ट पूरी तरह से तैयार कर लिया था. इंटरव्यू की तैयारी में भी अपने ऊपर फोकस था और फाइनली 2017 में निकाल लिया.

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