उषा किरण खान को मिला भारत-भारती सम्मान, बिहार के तीन लेखकों का हुआ चयन

उषा किरण खान-जन्म : 7 जुलाई 1945, लहेरियासराय, दरभंगा (बिहार), भाषा : हिंदी, मैथिली, विधाएँ : उपन्यास, कहानी, नाटक, मुख्य कृतियाँ, उपन्यास : पानी पर लकीर, फागुन के बाद, सीमांत कथा, रतनारे नयन (हिंदी), अनुत्तरित प्रश्न, हसीना मंजिल, भामती, सिरजनहार (मैथिली),कहानी संग्रह : गीली पॉक, कासवन, दूबजान, विवश विक्रमादित्य, जन्म अवधि, घर से घर तक (हिंदी), कॉचहि बॉस (मैथिली), नाटक : कहाँ गए मेरे उगना, हीरा डोम (हिंदी), फागुन, एकसरि ठाढ़, मुसकौल बला (मैथिली), बाल नाटक : डैडी बदल गए हैं, नानी की कहानी, सात भाई और चंपा, चिड़िया चुग गई खेत (हिंदी), घंटी से बान्हल राजू, बिरड़ो आबिगेल (मैथिली) बाल उपन्यास : लड़ाकू जनमेजय

उत्तरप्रदेश हिंदी संस्थान के वर्ष 2018 के लिए घोषित पुरस्कारों में भारत-भारती सहित बिहार के तीन लेखकों को सम्मान मिला है। जानी-मानी साहित्यकार पद्मश्री उषा किरण खान को पांच लाख रुपए का भारती-भारती सम्मान, भागलपुर के प्रो. श्रीभगवान सिंह को चार लाख रुपए का महात्मा गांधी साहित्य सम्मान और शांति जैन को दो लाख रुपए का लोकभूषण सम्मान देने की घोषणा की गई है।

बड़े लेखकों के साथ जुड़े अपने संस्मरणों को लिख रही हैं उषा किरण खान : उषा किरण खान से बात की तो उन्होंने कहा कि सम्मान से साहित्य लिखने की रुचि बढ़ती है, देखिए सरस्वती कब तक मुझसे लिखवाती रहती हैं। अज्ञेय, नागार्जुन, शमशेर बहादुर सिंह आदि जैसे बड़े लेखकों के साथ मेरे काफी अच्छे संस्मरण हैं उसी को अभी लिख रही हूं। नई पीढ़ी के लेखक और पाठक यह पढ़ना-जानना चाहते हैं।

महादेव भाई देसाई की डायरी पढ़ रहे हैं, इसके बाद किताब लिखेंगे श्री भगवान सिंह : प्रो. श्रीभगवान सिंह ने कहा पुरस्कार मिलने पर आभार जताया। उनकी आठ किताबें गांधी पर हैं। 1917 से 15 अगस्त 1942 तक देसाई गांधी जी के साथ रहे थे। इसे पढ़ने के बाद वे इस पर किताब लिखेंगे। 5 अक्टूबर 1945 को उन्होंने जवाहरलाल नेहरू को लंबा पत्र लिखा कि यह दुनिया उल्टी ओर जा रही है।

जेपी को सुलाने के लिए उन्हें भजन सुनाती थीं शांति जैन : शांति जैन ने कहा कि पुरस्कार की घोषणा से खुशी हो रही है। वे इन दिनों ‘वेदोत्तर संस्कृत साहित्य में संगीत’ विषय पर किताब लिख रही हैं। शांति जैन हिंदी की जानी-मानी कवयित्री हैं और 32 किताबें लिख चुकी हैं। उन्होंने 97 में ‘बिहार गौरव गान’ लिखा, जिसकी तीन हजार प्रस्तुतियां हो चुकी हैं। वे जेपी को सुलाने के लिए भजन सुनाती थीं। ऐसे 150 भजन हैं।

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