सुप्रीम कोर्ट का अजीब फैसला, रेप करने वाले आदमी को बाइज्जत बरी कर दिया

सुप्रीम कोर्ट ने रेप के आरोपी को बरी किया, कहा- उनकी फैमिली लाइफ डिस्टर्ब नहीं करना चाहते : तमिलनाडु. यहां एक शख्स पर अपनी नाबालिग भांजी के रेप का आरोप लगा. कोर्ट ने उसे POCSO एक्ट के तहत 10 साल की सज़ा सुनाई. आरोपी सज़ा रद्द कराने सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. 9 मई को सुप्रीम कोर्ट ने विशेष परिस्थिति का हवाला देते हुए उसकी सज़ा रद्द कर दी. हालांकि, कोर्ट ने कहा कि इस फैसले को मिसाल न माना जाए.

इस मामले में आरोपी रिश्ते में विक्टिम का मामा लगता है. दक्षिण भारत के कुछ समुदायों में मामा-भांजी की शादी हो जाती है. इसी को देखते हुए आरोपी ने नाबालिग को शादी का झांसा दिया था. विक्टिम तब 14 साल की थी. घटना के बाद आरोपी ने विक्टिम से शादी कर ली. घटना के एक साल बाद नाबालिग विक्टिम ने एक बच्चे को जन्म दिया था. मद्रास हाई कोर्ट ने इस मामले में आरोपी को 10 साल की सजा सुनाई थी.

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी कि उसने विक्टिम से शादी कर ली है. आरोपी का कहना है कि उसने शादी का वादा किया था और उसने शादी की.  उसने कहा कि अब उन दोनों के दो बच्चे भी हैं. दोनों का पारिवारिक जीवन अच्छा चल रहा है. आरोपी के दावों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर विक्टिम का बयान लिया गया. विक्टिम ने कहा, “मेरे दो बच्चे हैं. और मेरा पति हमारा ध्यान रख रहा है. और हम एक खुशहाल ज़िंदगी जी रहे हैं.”

विक्टिम का बयान सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी की सज़ा को रद्द कर दिया. कोर्ट ने कहा कि ये फैसला घटना के बाद के हालात को देखते हुए लिया जा रहा है. साथ ही कहा कि अगर आरोपी भविष्य में विक्टिम या बच्चों की देखभाल नहीं करता हो तो आगे उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी.

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, “ये कोर्ट जमीनी हकीकत से मुंह नहीं मोड़ सकता है. ये परिवार अब खुशी से जी रहा है. हम इस परिवार की खुशहाली को डिस्टर्ब नहीं करना चाहते. इस फैसले को मिसाल के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए.”

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