कु’ल्हाड़ी से नूपुर शर्मा का सि’र ध’ड़ से अलग किया, फिर क’टा सिर भी हाथ में लेकर दिखाया

कुल्हाड़ी से नूपुर शर्मा का सिर धड़ से अलग किया, फिर कटा सिर भी हाथ में लेकर दिखाया, कश्मीर के यूट्यूबर फैसल वानी का वीडियो वायरल : कश्मीर का YouTuber फ़ैसल वानी, नूपुर शर्मा का “सर कलम” करने की प्रैक्टिस करके दिखा रहा है। मस्जिदों की दीवारों पर खड़े होकर नूपुर शर्मा का सर कलम करने ऐलान किए जा रहे हैं। कमोबेश इसी तरह की भीड़ खड़ी की जा रही है जो सोशल मीडिया पर भावनाएँ हर्ट लिए घूम रही है, फिर जुमे की नमाज़ पर इकट्ठी होती है और बह जाती है। जस्टिफ़ाई करना हो तो दुनिया की ऐसी कोई चीज़ नहीं है जिसे जस्टिफ़ाई नहीं किया जा सकता।

गाय के नाम पर हत्या किए जाने के ऐलान भी फिर सही हैं। फिर हर हत्या को सही ठहराया जा सकता है, हर लिंचिंग के लिए कट्टरपंथी कम से कम पाँच कारण गिना देंगे कि कैसे उनकी भावनाएँ आहत हुईं, फिर तो गौरी लंकेश की हत्या पर भी पाँच कारण तैयार मिलेंगे। किसी ने एक गलती की, जानबूझकर की। उसकी दुनियाभर में बेज्जती हुई, आपको भी दुनिया भर से समर्थन मिला, पढ़े लिखे हिंदुओं ने भी आपका समर्थन किया।

उसकी पार्टी ने भी उन्हें निकाल दिया भले ही नाम के लिए ही निकाला हो। अब इसके लिए क्या अब पूरा देश इसी काम में लग जाएगा? हफ़्ते भर से यही हो रहा है। दो जुमे की नमाज़ चली गईं। दोनों बार हिंसा हुई। अब इसके लिए दोषी तो किसी को भी ठहरा दिया जाए, कभी हिंदुओं को कभी पुलिस को, लेकिन मस्जिदों पर चढ़कर सर कलम के नारे लगाने वाले आपको क्यों नहीं दिख रहे? पूरे देश में कल हिंसक प्रदर्शन हुए, क्या इसमें आपकी कोई गलती नहीं है? किस तरह की मानसिकता को तैयार किया जा रहा है बच्चों में। आप सोशल मीडिया पर ही लोगों के कमेंट पढ़िए पता चल जाएगा कि किस हद तक Radicalisation हो रहा है। रामनवमी पर कोई हिंसा होती है तो आप खूब बोलते हैं, जुमे की नमाज़ के बाद पूरे देश में हो रहीं हिंसाओं को आप ये कहकर जस्टिफ़ाय करते हैं कि पुलिस की गलती है, हिंदुओं की गलती है, ये तो क्रिया की प्रतिक्रिया है। जुमे की नमाज़ गई है तो दशहरा भी आएगा, रमानवमी भी आएगी, होली भी आएगी, हनुमान जयंती भी आएगी। तब हिंदू चरमपंथियों की भीड़ “काटे जाएँगे” के नारे लगाएगी तब आप किस मुँह से विरोध कर पाएँगे?

पुलिस और सरकार की ज़्यादती आज के माहौल के लिए दोषी है, लेकिन फिर भी दोनों धर्मों के लोगों से यही अपील है कि शांति बनाए रखें, एक दूसरे पर विश्वास करें, धर्म के नाम पर बहे नहीं। सबको साथ रहना है। जुमे की नमाज़ भी करनी है, राम नवमी भी मनानी है। मुश्किल वक्त में एक दूसरे का साथ दीजिए, और अगर अपने लोग कहीं भटकें तो उन्हें समझाइए।

-Shyam meera singh

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